Honeymoon का तड़का

अरे रिया ,तुम्हारे गले पर क्या हुआ..?? जैसे ही मैं चेयर पर बैठी …माँ सब्जी काटते हुए पूछी.

कौन ..ये..ओह .. उउउममम … वो जूही मौसी ने हार दिया था ना…. वो उसी का निशान लग गया होगा.. मैं घबराकर नज़र चुराते हुए ..खांशते हुए जवाब दी.

हां..वो आर्टिफीसियल होगा..आज कल के लोग ना.. बस दिखावे के चक्कर में ना.. परवाह नहीं करते कुछ भी दे देते है.. मेरे रूम में दवाई रखा हुआ है.. जा के लगा लेना.. माँ प्यार से देखते हुए बोली.

तो कैसा रहा ट्रिप.. माँ मुस्कुराते हुए पूछी.

बहुत ही अच्छा.. हम तो सही से एक दिन भी रूम से बाहर नहीं निकले.. दरअसल ,बारिश हो रही थी …मैं नेलपॉलिश लगते हुए शर्मीली मुस्कान दी .

हां.. टीवी पे देख रही थी.. गोवा में पूरे टाइम बारिश हो रही थी .. हम्म तो मज़ा कैसे आया होगा ??. माँ उत्सुकता से पूछी.

मज़ा तो किया हमने..मज़ा तो फिर भी आया..और जो मज़ा आया उसका तो नाम भी नहीं ले सकती.. मैं मुस्कुराते हुए जवाब दी.

मतलब…देखो..
जैसे मसाला भुनता है ना.एक दम धीरे-धीरे..फिर नरम हो जाना…उसी तरह शुरुआती उत्साह…
तभी अचानक से उसमे हरी मिर्ची डाल देते है.. तीखी, सुलगने वाली.. मैं दांतो को धीरे से दबा के बोली

और फिर जब यह जलता हुआ मसाला कढ़ाई में पड़ी उस उबला हुआ राज़मा में पड़ता है… और हम मिलाते जाते है.. मिलाते जाते है..दोनों एक दूसरे से ऐसे लिपट जाते है की ये दोनों अलग-अलग चीजे थी पता ही नहीं चलता…जैसे उस कढ़ाई में उनके सिवा कोई और है ही नहीं.. हाँ…बिल्कुल दो जिस्म एक जान की तरह…. पूरी हो जाने वाली फीलिंग..एक हो जाने वाली फीलिंग..वो आआअह्ह ..मत पूछों मम्मा.. मैं आहें भड़ती हुई बोली.

फिर वो लाल आग पे वो कुकर की लास्ट सीटी लगती है ना..माँ.. उफ्फ्फ ..वो सीटी.. मैं आँखे मूँद के अपने गले के निचले हिस्से पर लगी उस निशान ,उस लव बाइट्स पर प्यार से हाथ फिराते हुए.. बोली.. मेरे बदन के सारे
रोएँ खड़े हो गए थे..
Actually , There is no word to explain that feeling mummaa ..और मैं फिर से अपने बांकी बचे उंगुलियों में नैल पोलिश लगाने लगी.|

क्या सीटी-सीटी लगा रक्खी है… तब से बस बकबक कर रही है.. माँ झुंझलाते हुए बोली.

अच्छा तुम्हे क्या लगता है मम्मा ,मैं क्या बोल रही हूँ.. मैं हलकी मुस्कान के साथ पूछी.

तुम्हे कुछ नहीं बस भूख लगा है.. माँ गैस चूल्हा का स्विच दायी तरफ घुमा के चूल्हा को बंद करते हुए बोली.

भूख ..भूख.. हम्म मम्मा कुछ ऐसा ही.. मैं नैल पोलिश के ढक्कन को लगाते हुए बोली.

क्या बावली की तरह बात कर रही है.. चल खाना खा ले.. माँ टेबल पर खाना रखते हुए..
वाह..!! मम्मा.. राजमा- चावल.. और मैं ख़ुशी से माँ के गले लग गयी.

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