प्रेमकथा: एक बार तुम भी कहते

जैसे-जैसे.., मैं उसके हाथो की अंगुलियों को अपने हाथो में जकड़ती हुई उसके बदन के और करीब जा रही थी उसके आँख धीरे -धीरे बंद हो रही थी और उसकी साँसे तेज और हाथो की जकड़न मज़बूत हो रही थी, मैं बस अपने होठो की लाली से उसके होठ रंग देना चाहती थी , मेरे होठ उसके ठुड्डी को छूते हुए उसके होठ तक पहुँचने ही वाले थे की …

अंकिता ..अरे, अंकिता….!! कमरे का दरवाजा धीरे से खटखटाते हुए भैया धीमे से पुकारे .

क्या यार , तुम्हारे भाई लोगो को भी चैन नहीं ..इतनी गर्मी है … आराम से सोया नहीं जाता .. राहुल , नाक चढ़ाते हुए फुसफुसाते हुए बोला.
अरे तो क्या मैं बोली थी आने को .. नठकीले अंदाज़ में धीमे स्वर में उसके हाथो को छोड़ते हुए मैं बोली .
जी भैया…, मैं अपना टी-शर्ट ठीक करते हुए …दरवाजा खोलते हुए बोली.

राहुल रूम में ही है क्या..? आँखों से इशारा करते हुए पूछे
हाँ , कुछ काम है क्या… मैं बड़ी ही तत्परता से जवाब देते हुए पूछी..
नहीं रे.. इधर आओ एक बात करनी है , मेरा हाथ पकड़ के प्यार से खींचते हुए अपने रूम की तरफ ले जाते हुए बोले .
रूक बताता हूँ..थोड़ा ज्यादा ही सीक्रेट है …भैया ,कमरे का दरवाजा लगाते हुए बोले .
अच्छे से देख कर बता, ये कैसी है…..अपने मोबाइल से एक फोटो दिखाते हुए पूछे

जब आपको कोई इतनी सीक्रेटली फोटो दिखाए, तो जरूर ही वो उसे अच्छी लगती है ,पसंद है .. क्योंकि आदमी राय तो सबके सामने भी मांग लेता है, सकता है .इस परिस्थिति में आपका ‘ ना ‘ उसके लिए कोई मायने नहीं रखता बल्कि बाद में और अधिक समस्याएं खड़ी कर सकता हैं…आपके रिश्तो में दरार डाल सकता है.

‘ हाँ ‘ भैया, खूबसूरत है .. है  कौन.. मैं उत्सुकता से पूछी.’ हाँ ‘ भैया, खूबसूरत है .. है  कौन.. मैं उत्सुकता से पूछी.

दिव्या है , मैं इससे दिल्ली में मिला था.. हम  दोनों  एक  दूसरे  से प्यार  करते  हैं …और शादी  करना चाहते  हैं | शादी..!!

वो शादी  वाली  बात  सुन  कर  मेरे  दिल  को  कुछ  धक्का  सा  लगा,और मेरी जहन की कुछ बाते ताज़ा हो गयी.

और इसमें मेरा तुम ही पापा मम्मी को मना के हेल्प कर सकती हो . भैया अपनी बात ख़त्म किये .. और मेरी और आशा भरी नज़रो के साथ देखने लगे .

मैं बिलकुल स्तब्ध थी .. मेरे अंदर पता नहीं कुछ और ही चल रहा था.अभी तुरंत जो रोमांटिक मूड मेरे रोम-रोम में समाया था, पता नहीं कहा भाग खड़ा हुआ, और मुझे कुछ और बात के साथ इस हां या ना के मोड़ पे खड़ा छोर दिया… बिलकुल अकेला…बिलकुल..

बोल ना ,अंकिता..मनाएगी ना ..बात करेगी ना ..

******************************

अब, पहुँचने ही वाले हैं .. पापा हमलोग की और देख कर ,सीधे होकर बैठते हुए बोले .

मम्मी अपनी सारी को ठीक करती हुई ,..ठीक से तो दुपट्टा डाल लो ..मेरा दुपट्टा ठीक करते हुए बोली.

तभी गाड़ी ब्रेक के उस झटके के साथ उस दरवाजे पर पहुँच गयी.

मम्मी गाड़ी से उतर के फूफा जी को झुक के प्रणाम की , तभी मैं भी उनके चरण स्पर्श की .. और हम दोनों अंदर चले गये.
पापा वही पर उन लोगो से बात करने लगे .. और छोटू एवं सोनू हमलोगो का सामान उतरने लगा .

मैं बुआ को प्रणाम की और अंदर रिया के कमरे में कपड़े चेंज करने चली गयी .

वो लोग तो आज ही आयें हैं .. पर रमन नहीं आया है .. बोल रही थी की .. अभी छुट्टी नहीं है .. पर मुझे तो लगता है की वो लोग उसे अभी लाना ही नहीं चाहते थे..
मैं तो अभी अंकिता को लायी भी इसीलिए थी.,इसके भी एक्जाम्स होने वाले है,हॉस्टल वाला इसीलिए आने भी नहीं दे रहा था. कम से कम वो लोग इसे देख ले … खैर , चलो रमन नहीं तो वो लोग तो देख ही लेंगे ….
मम्मी और बुआ बातें कर रही थी ..जैसे ही हम उनके पास पहुंचे …अंकिता को सारा प्लान बताई बुआ, रिया से पूछी…

मम्मी , अभी-अभी तो आयी है .. थोड़ा घूम लेने दो , सबसे मिल तो लेने दो .. फिर अच्छे से डिसकस करेंगे …मम्मी के मी.. पर थोड़ा जोर देते हुए रिया जवाब दी.

फिर हम लोग सबसे मिलने चलें गए ….इसे देख रही हो..?? आँखों से इशारा करते हुए रिया मेरी कान में फुसफुसाई .
हाँ .. कौन है..?? मैं पूछी .
यही तो रमन का भाई है … रिया धीरे से मेरी ओर देख के जवाब दी .
मैं बस एक बार देखते हुए आगे बढ़ गयी …

उसके बाद हमलोग रात को उस प्लान पर डिसकस किये…कैसे जूते चोरी करने है..कैसे रोमा को अच्छा से सजाना है.. वगैरा-वगैरा…

मैं जब भी रमन की माँ को देखती .. अच्छे से व्यवहार करती .. हर वक़्त उनकी जी हुज़ूरी में लगी रहती .. माँ का यही आदेश था, और कुछ हद तक मेरा मन भी.
किसे मन नहीं होगा की उसकी होने वाली सास के साथ उसका मेल-जोल रहे..|

तभी तो ‘ चेतन भगत ‘ ने अपनी पुस्तक ” Two States : The Story of my Marriage ” में लिखे हैं
” भारत में शादी का मतलब दो लोगो का मिलान नहीं, दो परिवारों का मिलन होता है ”

और अगर आप लड़की की तरफ से है तो आपके और एफर्ट लगाना पड़ता है ..शादी जुड़ने से पहले भी बचाने का पूरा कोशिश किया जाता है .

उसी कोशिश में मेरी माँ थी .. और मैं माँ की बातो का पूरे तरह से पालन कर रही थी . मॉडर्न कितनी भी हो जाऊँ…” लड़की हूँ ना “.

अब हमें आज्ञा दीजिये अब तो शादी भी हो गयी .. और अंकिता को वो लोग देख भी लिए .. बहुत बहुत धन्यवाद् .. मेरे पापा फूफा जी से गले मिलते हुए बोल रहे थे .
हम लोग फिर उसी उजले रंग की स्कार्पियो में सवार हुए और अपने गन्त्वायं स्थान को निकल पड़े … अपने घर को निकल पड़े.

ट्रिंग..ट्रिंग ..प्यार भरा नोकिआ का ट्यून बड़ी देर से किसी के फ़ोन उठाने का इंतज़ार कर रहा था.दो तीन बार फ़ोन कटने के बाद मैं तीसरे बार ..

हेलो .. कौन ..??

जी … जी …जी मैं गोविन्द बोल रहा हूँ .. उधर से बड़ी सी धीमे स्वर में प्यार भड़ी आवाज आयी . उस आवाज में कुछ बचपना झलक रहा था .

पापा फ़ोन आज घर पर ही भूल गए है ..पापा आएंगे तो बोल दूंगी .. मैं उसकी एक और बात बिना सुने अपना बात बोलते हुए फ़ोन कटने ही वाली ही थी .
सुनिए ना .. मुझे आपसे ही बात करना है .. आप अंकिता बोल रही हैं ना ..

जी, मैं ही अंकिता बोल रही हूँ .. बोलिये .. आप मेरे हॉस्टल से तो नहीं हैं ..
सर, मैं कल आ जाऊँगी .. मेरे दीदी का शादी था ना … इसीलिए थोड़ा लेट हो गयी हूँ …मैं डरते हुए हिचकिचाते हुए जवाब दी .

नहीं जी .. मैं आपके हॉस्टल से नहीं .. मैं पतैली से गोविन्द बोल रहा हूँ .. वो थोड़ा हस्ते हुए जवाब दिया .
ओह ..!! अरे आप बोल रहे है . माँ से बात करना है क्या … रुको मैं देती हूँ …

पो -पो – पो …की उस मधुर स्वर के साथ तब तक फ़ोन कट चूका था… मैं मुस्कुरायी, और मेरी मन में पता नहीं क्या ख्याल आया मैं उसका नंबर नोट कर ली .

और अंकिता कैसा रहा शादी , मेरी रूममेट संजना रूम खोलते हुए पूछी .
बहुत बढ़िया रहा ..बहुत मज़ा आया ..चलो आती हूँ फ्रेश होकर तब एक बात बताती हूँ .वाशरूम की और जाते हुए मैं बोली …

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