कहीं ना फिर देर हो जाए…

भैया  1 किलो  भिंडी देना..कहते  हुए  मैं  अच्छे -अच्छे  भिंडी चुन कर पॉलीथिन में रखने लगा ,
साहब  एक  दम  फ्रेश  माल  है ..आज  ही  उतरा  है ..वो  रैंडम्ली भिंडी लेकर  तराज़ू  में  डालते  हुए  बोला .

पटना  की  हाटों पर  सामान्यतः  ऐसा  ही  देखने  को  मिलता  है ..खचाखच भीड़ से भड़ी ,हर वक़्त पो -पो ..करती तीखी आवाजे आपके  कानो को चीरती ,आपके  बातों  को कम और दूकानदार  के  बातों   को  अधिक ..महत्व  दिलाने के लिए काफी होती है.वो  इन  कानो  में  चुभती  आवाजों  का  आदी  होता  है और लोग जल्दी से वहां से निकल जाने की चाह में .उसकी बातों को मजबूरन मानना पड़ता हैं. परन्तु कुछ ढीठ लोग अड़े रहते हैं. और वो अपनी बात मनवाकर ही दम लेते है.

 

मैं पहले वाले लोगो में से हूँ..और  मैं  भी  इसी  सोच के  साथ की जल्दी से  साब्जियां  लेकर इस जगह से जान छुड़ाऊं..जेब  से  रुपैये  निकाल कर  सब्जी  वाले  को  देते  हुए  ,अपना  थैला लेकर इधर-उधर देखते वहां से निकलने की कोशिश करने लगा…

शाम का वक़्त और सब्जी मंडी ..सबसे बेहतर वक़्त और जगह होती है लड़कियों को देखने की, नहीं-नहीं …तारने की.

फिर भी आज मेरे पैर की चाल पहले से अभी कुछ ज्यादा ही तेज थे.शायद मैं इस दूरी को जल्दी से पूरा कर लेना चाह रहा था.

पो -पो ..पो -पो ..अरे यार कितना जगह तो खाली है ..उधर से निकल जाओ ..मैं  अपने बाएं हाथ  से दाहिने तरफ की और इशारा करते  हुए थोड़ा जोर से  बोला.फिर  से  पो -पो  ..पी -पी ..क्या  हुआ भाई ??  इतना  जगह  छोड़ के मेरे ऊपर  ही  चढाने  पर  क्यों  तुले  हो ..कहते  हुए  मैं  रूक  के पीछे की और  मुड़ा..
अरे  कब  से  हॉर्न  दे  रही  हूँ ..सुनता  ही  नहीं |
एक  लड़की  किसी नयी-नवेली दुलहन की भांति घूँघट की तरह बिल्कुल लाल  रंग का  हेलमेट पहने हुए चिल्लाते हुए गाड़ी मेरे पास  लेकर  रोक  दी.जैसे की, मैं ही उसे बीच मंडप में छोर के भाग आया हूँ. परन्तु जब गौर से देखा तो..सारी उलझने दूर हो गयी |

वो पीले रंग की टी -शर्ट एवं काले रंग की जीन्स पहनी  हुई थी .परन्तु धुल के कुछ कण उस काले जीन्स को कुछ जगह पर उजला बनाकर उसके गोरे बदन से मिलवाने की भरपूर कोशिश कर रहे थे..
और ब्लू जीन्स एवं उजली टी-शर्ट में उसके पीछे राहुल बैठा था.

वो गाड़ी  को सड़क के एक तरफ लगाई और हेलमेट उतारने लगी,तब तक राहुल मेरे पास आकर अपने हाथो की गर्माहट से मेरा हाथ गर्म करते हुए
हाय बोला..
हाय ..मैं  भी  तत्परता से अपने दाहिने हाथ से थैला बाएं हाथ में करते हुए बोला |

हाय … गोविन्द यहाँ  क्या  कर  रहे  हो ..दिव्या मुझसे गले मिलते हुए पूछी.

उसकी  बदन  गुलाब  की तरह महक रही  थी ..शायद, अभी-अभी परफ्यूम  लगाकर  घर  से  निकली होगी  .उसके  कानो  के झुमके मेरे  गालो  को  छूकर उस  गर्मी  में  ठंढक का एहसास  करा  रहे  थे. और अंदर की बेचैनी बढ़ा रहे थे.

माँ का हुक़्म था, सब्जी  लेने आया  था..तुम  लोग  कैसे .??.मैं  मुस्कुराते  हुए जवाब  देते  हुए पूछा.
हम लोग भी उसी की खोज  में  निकले है ..कहते ही दोनों हंस पड़े…मैं भी अपनी हंसी नहीं रोक पाया और उनका साथ देने  लगा .

और क्या कर रहे  हो ..??  हंसी को रोकते  हुए पूछी.

वह अपने होठो पर लगी लाल  लिपस्टिक को अच्छे से होठो से दबा के फैला रही थी शायद , उसे  लग रहा  था  की  हँसने के कारण  लिपस्टिक ख़राब हो गयी है.परन्तु अब भी वह पहले की तरह ही उसी तरह व्यवस्थित थी.उसके भौं  किसी  होनहार कारीगर ने बड़ी ही दिल्लगी के साथ बनाया होगा ..जो उसकी  पतले -छोटे  से  मुख  की  सुंदरता  बढ़ा  रहा  था .वो  जितनी  बार  पलके  झपकती  उसके आँखों में लगी काले काजल और गालों की लाली जो की हसने पर स्पष्ट दिखाई दे रही थी ,मुझे अपनी तरफ आज भी आकर्षित कर रहे थे |

अभी एडोबी  में  काम  कर  रहा  हूँ ..पर  फिलहाल छुट्टी पर पड़सो ही  माँ से मिलने घर आया  हूँ, तुमलोग के बारे में पता नहीं था ,नहीं तो तुमसे भी मिलने आता…मैं  शालीनता से  जवाब  देते  हुए राहुल  से  पूछा ..
तुम  क्या  कर रहे  हो ..??
टी सी अस  में  काम  कर  रहा  हूँ ..राहुल  सर  हिलाते  हुए  जवाब  दिया ..
और मैं रिलायंस पावर में काम करती हूँ ..और ..राहुल के  साथ सूरत में  ही रहती  हूँ .. दिव्या मुस्कुराते हुए राहुल की आँखों में  देखकर  उसके हाथो की अँगुलियों में अपने हाथो की अंगुली को जकरतें हुए हुए बोली..

******************

अरे,गोविन्द कितने मार्क्स आये ??..अंकुर  पीछे  से  मेरा  कंधा पर अपनी हाथो की मज़बूती से जोर देते हुए  पुछा ..
238 आये  है ..मेंस वाले  में ..मै अपनी  बात  ख़त्म कर  ही  पाता की  उससे पहले  ही और  एडवांस वाले में ..उसने  पूछा
112..कम आया यार  मैं  थोड़ा  चिंता  का  भाव  देते  हुए  बोला.वाह साले 238 कम  है  क्या  ..फाड़ दिए हो और  बोलते हो  कम  है ..कितने  चाहिए  400..वाह !!  बोलते  ही  हम दोनों  हंस  पड़े .

तुम्हे  कितने  नम्बर आएं ??मैंने  उत्सुकता से  पूछा
246 मेंस  में  और 182 एडवांस  वाले  में ..वाह  रे  ..फाड़े  तुम  हो  बोलते  हो  मुझे …कहते  हुए  हम दोनों  फिर  हंस  पड़े .
अरे सुन ना अंकुर,वह क्लास रूम  से बाहर जा रहा था तभी मैंने उसे रोकते हुए बोला .
क्या ..??वह  पीछे  मुड़ के  मेरी  ओर  देखते  हुए  पूछा.
उसे  कितना नम्बर  आया , मैं  धीमे स्वर में सर  झुकाते हुए शरमाते हुए पूछा …
किसे ??..बोल कर वो  मेरी  ओर  देखने  लगा ..अच्छा  दिव्या  को ..वो  दिव्या  के  नाम  पर  थोड़ा जोर देते हुए धीरे से बोला ..

हाँ ..मैं  मुस्कुराकर सर हिलाते हुए जवाब दिया.
अच्छा रूक, पता करके बताता  हूँ ..वो  बोलते  हुए ..क्लास  से  बाहर चला  गया .

202 मार्क्स  आये है  मेंस में … एडवांस का पता नहीं ..वो  सीट  पर  बैठते  हुए  बताया .
चलो  अच्छा  है ..मैं  CANNIZARO REACTION का  मैकेनिज्म लिखते हुए बोला .

पता  है  आज  डायरेक्टर  मैम आने  वाली  है ..वो  अपने  बैग से  कॉपी  निकलते  हुए  बताया.
क्यों ..??मैंने पूछा..
टीचर्स  का फीडबैक लेने आ रही  होगी शायद ..
इससे पहले हमदोनों एक ही बार ना मिले है ,उनसे …बीच में ही मैंने पूछा ..हाँ उसने जवाब दिया चलो, इसी बहाने अच्छे से देख तो लूंगा ..मैं  मुस्कुराते  हुए  बोला |

आप  लोग  यह  सभी  प्रश्न  को  बना  के रखो ..राहुल  गोयल  सर ..क्लास  रूम  से  बहार  निकलते  हुए  बोले ..
अभी थोड़ी ही देर पहले कोई स्टाफ आकर उनको बाहर आने के लिए बोला था .

लगभग  2 मिनट  के  बाद  क्लास रूम  का  दरवाजा तेजी से खुला आगे-आगे दो मैडम उनके  पीछे डायरेक्टर मैम क्लास रूम में किसी सेलेब्रेटी की भांति प्रवेश की और उनका स्वागत भी कुछ उसी तरह हुआ .

वो ब्लू रंग की टाइट जीन्स एवं गुलाबी रंग की टी -शर्ट पहनी हुई थी .उनकी आँखों में लगी काजल उनके लाल फ्रेम वाले चश्मा के बाहर से भी स्पष्ट दिखाई  दे रही थी .परन्तु  गालो एवं आँखों के पास  की कुछ झुर्रिया उनके उम्र का असली पता दे रही थी .

MY NAME IS RINKU JAISWAL,VICE DIRECTOR AND WIFE OF ANAND JAISWAL…अपना  परिचय  देते  हुए  बोली.
उन्हें ऐसा लग रहा था की क्लास में कोई उन्हें नहीं जानता है.और लगना स्वाभाविक भी था वो लगभग इन डेढ़ वर्षो में पहली बार क्लास में आयी थी.
वो अपना लैपटॉप पोडियम पर रखी, LET ME OPEN YOUR BATCH FILE,
फाइल पर थोड़ा अधिक जोर दी परन्तु धीरे  से…
यह बैच कौन सा है ..?? अपने  बगल  में  खड़ी एक  मैडम  से  पूछी .
GR 2 मैम .. उन्होंने  तुरंत  जवाब  दिया .

सहयोगी,बड़े लोग और मीटिंग तीनो का बहुत बढ़िया सम्बन्ध होता है..यह लोग कहाँ जाते है, यह पता होता है की नहीं, पता नहीं .अभी-अभी वह इस बैच में आयी है और उन्हें यह भी पता नहीं है की यह बैच है कौन सा, शायद ज्यादा व्यस्त होने के कारण याद नहीं रह पाती या कुछ और ,पता नहीं, खैर, ये बड़े लोगो है .

WHO IS ABHISHEK KUMAR ?? बोलते हुए रिंकू मैम हमलोगो की और देखने लगी .
मैम ..I AM..एक लड़का दूसरी बेंच से खड़ा होते हुए बोला.

तुम्हारा नंबर इतना ऊपर-नीचे क्यों हो रहा है ..? मेन्टेन रखो ..पहले  तुम्हारा  काफी  अच्छा  था ..बीच में  ख़राब  हुआ अभी  फिर  ठीक है ..अच्छे से मेहनत करो ..कांस्टेंट  रखो …INCREASING WAY में  रखो …DECREASE मत होने दो ..

लगभग  2 मिनट  तक  स्पीच  देने  के  बाद ..उसको अपनी सफाई में बिना कुछ कहने का मौका दिए बिना ..ठीक  है ..हाथ  से  बैठने  का  इशारा  करते  हुए  बोली .

अंकुर ..मैम  एक  और  नाम  पिक  करते हुए  बोली .
YES..मैम  मैं  हूँ ..अंकुर  खड़ा  होते  हुए  बोला ..
तुम  बहुत अच्छा  कर  रहे  हो  शुरु से  ….अच्छा मैम कुछ देर रुकी और अपने लैपटॉप में देख कर. और गोविन्द चौधरी कौन  है..मैम इधर-उधर नज़र घूमाते हुए बोली .
जी….YES मैम …खड़ा होते हुए मै बोला..
तुम  दोनों  का  सिलेक्शन  एचीवर्स (मेंटर्स एडुसर्व का सबसे पहला बैच) के लिए हुआ था , गए क्यों  नहीं ..मैम  उत्सुकता  भड़े नज़रो से देखते हुए बोली ..
शायद बहुत कुछ जानना चाहती थी.
हम दोनों एक दूसरे का चेहरा देखने लगे तभी..मैम यहाँ भी अच्छे टीचर है .इसीलिए ….जब  तक अंकुर  अपना  बात  ख़त्म  कर  पाता

मेंटर्स  एडुसर्व  में  सारे टीचर्स अच्छे हैं …हम सभी बैच को बराबर देखते है ..ट्रीट करते है ..मेंटर्स  में कोई भी टीचर कम नहीं है ..मैम  लेक्चर टेबल से हटकर बीच में आते हुए एक ही सांस में सारी बातें बोली..

अपनी बड़ाई के मामले में कुछ लोग ,कुछ नहीं बोलते वह बस करने में विस्वास रखते हैं.परन्तु कुछ लोग जब कुछ बोलते हैं तो सारी बातें एक ही सांस में बोल डालते है,वैसे भी जब आप किसी कोचिंग संस्थान के डायरेक्टर हो तो आपको अपनी बड़ाई खुद ही करनी पड़ती है…यह बात अलग है की रिजल्ट भी बहुत कुछ बोल देती हैं.खैर कोचिंग संस्थान में अब तो अच्छे बच्चे ख़रीदे भी जाते हैं.

वाह क्या झुमका है ..मैं मन ही मन देख कर  खुश  हो रहा था ..वो बालों को कभी अपने कानो से पीछे करती तो कभी फिर से वहीं पर वापस प्यार से खींच के ले आती..उसे इस कदर ऐसा करते देख मेरी सारी रुए खड़े हो रहे थे.उसके गाल किसी छोटे बच्चे की तरह बिलकुल चिकनी दिख रही थी .और  उसपर लगी रूज अपनी लालिमा बिखेर रहा था.मक्खन सी गोरे गाल पर वो उस रूज की लाली उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा रही थी ..और ब्लू टॉप तो उसे और भी मनमोहक बना रही थी..कोई देखते ही दीवाना हो जाये..

तभी मेरे हाथ पर कलम से धीरे से मारते हुए अंकुर आगे की  ओर नज़र से इशारा करते हुए… ऐ गोविन्द बोला…
तब तक मैम भी मुझे दो- तीन बार पुकार चुकी  थी.
YE..YESS..मैम ,मैं  हरबराते हुए बोला
तुम क्यों नहीं गए एचीवर्स बैच में ..जी मैम वही कारण यहाँ के टीचर से पढ़ के मज़ा आता है ..अच्छा लगता है .. और मैम एचीवर्स बैच में और इस बैच में लगभग सारे टीचर सेम ही तो है ..मैं  डरते  हुए जवाब दिया ..

मैम मुस्कुरा रही थी ..और मुझे डर लग रहा था ..शायद वो मुझे दिव्या को देखते हुए देख तो नहीं ली.

ठीक है..जहाँ भी पढ़ो अच्छे से पढ़ो..तुम दोनों का,तुम सब का, मैम बात को सही करते हुए बोली .. रिजल्ट ख़राब नहीं  होना चाहिए..
और मैम क्लास रूम से बाहर जाने के लिए अपना दायाँ पैर आगे बढ़ाई..गुलाबी मोज़े और गाढ़ा लाल रंग की सैंडल में उनकी पैर और भी हसीन दिख रही थी.

**************

हम चाहते तो है बहुत लोगो को ,किसी को कह नहीं पाते तो कोई समझता नहीं.
कभी-कभी तो दोनों तरफ से चाहत रहती है,किन्तु पहले वो बोलेगी, तो पहले वो बोलेगा के चक्कर में कोई भी एक दूसरे से नहीं बोल पातें,और बाद में फिर पछताते हैं.काश ,बोल दिया होता.
कभी किसी को आपकी उस समय कद्र नहीं होती,और बाद में वही बातें…..काश पहले…..

फिर हमारे जिंदगी में कोईं दूसरा आ जाता है.शायद,उसकी जिंदगी में भी.
परन्तु कोई एक खास होता है जिसे हम कभी नहीं भूल पाते लाख कोशिश के बाद भी..कभी नहीं…  और वही जब आपको बहुत दिनों बाद मिले तो आपको उसे देख के उससे भी ज्यादा खुशी मिलती  है

जब  कोई  रिलेशनशिप  में  हो  और  वो  दोनों  बहुत  दिनों  बाद  मिल  रहे  हो.इससे भी ज्यादा..

फिर जब आप उसके साथ किसी को देख ले तो मन को मानाने में जुटे होते है की यह बस इसका दोस्त या भाई हो..
परन्तु जब वो उसके हाथो की उंगुलियां इस कदर फांस ले की अब तो छोड़ना ही नहीं है…
तब उसपर वही बीतती है ,जो इस धरती पर जयेष्ठ के मौसम में बीतती है ,जब बारिश के लिए धरती तरस रहा होता है और उस धरती की बैचनी बादल नहीं समझता है.
और जब तक समझता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है..बहुत देर..

काश..वो अपनी इन उंगुलियों को मेरे उंगुलियों में फंसा कर..आँखों में देखकर ..प्यार से कहती ..मेरे साथ  कैलिफ़ोर्निया में रहती हूँ …काश…
तभी बगल से गुजर रही ऑटो में बज रहा गाना ,शायद मेरे ऊपर बिलकुल सही बैठ रहा था….
किसी से तुम प्यार करो तो फिर इज़हार करो कहीं ना फिर देर हो जाए….
कहीं ना फिर देर हो जाए….

 

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8 thoughts on “कहीं ना फिर देर हो जाए…

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  1. wow bhai pure life ka nichor de diye
    bs kuch hi pageo me
    bs patro ke naam v real rakhte to…

    mere dil ko chu liya manish
    ye real life story
    mehnt dikhta jata h

    Liked by 1 person

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