अज़नबी :अपनापन सा

SIN is equal to PERPENDICULAR by HYPOTANEOUS…..पंडित बद्री प्रसाद हरी -हरी बोल…
छत पर टहलते हुए मैं याद करने की कोशिश कर रहा था ..
सूरज भी अपनी तेज धीरे-धीरे समाप्त कर घर जाने को बेताब था और साथ में मेरी भी बेताबी बढ़ा रहा था आज का दिन ख़त्म करके ..कल से बोर्ड की एक्जाम्स सुरु होने वाली थी ..और वो भी कल मैथ्स का पेपर था |

मैं भी उस ढलते सूरज की तरह ही खुद में मैथ्स के फार्मूला और थ्योरम के प्रूफ्स को और अधिक प्रगाढ़ कर रहा था |
लेकिन कोई चीज थी जो बार बार मुझे अपनी और खींच रही थी ..उस दरवाजा का आधा खुला होना |

क्योंकि,अमूनन वह दरवाजा बंद ही रहती थी ….शायद किसी ने गलती से बंद करना भूल गया होगा ..कई बार मन को दिलासा दिलाने के बाद भी मन से यह बात नहीं निकल रही थी मैं उधर अंतिम बार देखा और वहा से चलें जाने की सोचा ..

कम से कम अंदर जाकर आराम से पढ़ तो सकूंगा,यही सोचते हुए मैं नीचे किताब लेने के लिए झुका और अंदर जाने के लिए कदम बढ़ाया ही था की ..मेरे कदम रूक से  गए.

जब आपको कोई बात परेशान कर रही हो तो आप या तो उससे भागना चाहते है
या उसके बारे में जानने की कोशिश करना चाहते है .और जब आपको उस बात के
बारे में कोई क्लू मिल जाये तो आप उसे जानना ही चाहते है |

और मैं उसी ओर देखने लगा,

वो गेट अपने आप खुलती और बंद हो जाती ..और मैं एक हाथ में किताब और दुसरे से कुर्सी को पकड़े हुए सर पर जिज्ञाषा की लकीर लिए खड़ा राह देख रहा था .
उत्सुकता बढ़ती जा रही थी …मन में कई तरह की बातें उफान ले रही थी ..

उस क्षण के लिए मानो SIN-COS से मेरा नाता ही टूट गया हो ..

तक़रीबन, एक मिनट के बाद गेट पूर्ण रूप से खुली और एक लड़की उसके पीछे से दाहिने हाथ अपने बालो को ठीक करते हुए एवं बाए हाथ से दरवाजे को पूरा खोलते हुए आगे बढ़ी |

मैं उसे पहली बार देख रहा था ..वो अपने छत पर आगे की ओर बढ़ रही थी पर मुझे लग रहा
था वो मेरी ओर बढ़ रही हो |

मैं चेयर को वही छोर किताब को उसी पर रखते हुए आराम से रिलैक्स होकर उस ओर देखने लगा .
शायद,अब जिज्ञाषा ख़त्म होने के वजाय और बढ़ ही गयी थी .

वो ऐसे बढ़ रही थी जैसे कोई परी परीलोक से उतरकर मेरी ओर आ रही हो ..
उसके कदम की चाल  पहले तेज ,फिर मध्यम गति में हो गये.पैरो की चप्पलें अच्छे से नहीं दिख रही थी .

परन्तु ,उजले रंग की शार्ट -लैगिन्स जिसपर की लाल छींटे पड़ी हुई थी,ठीक उसके घुटने के कुछ नीचे तक ख़त्म होकर उसके गोरे पैरो को और भी ख़ूबसूरत बना रही थी .

लम्बाई ठीक साढ़े पांच फुट होगी ,थोड़ी मोटी-थोड़ी पतली कमर चलते हुए बड़ी ही बखूबी से लचकते हुए उसके चलने में साथ निभा रही थी .कमर से कंधे के बीच की दूरी एक आदर्श लड़की की तरह करीब सवा फुट होगी |
उसके हाथ चलते हुए ऐसे लहरा रहे थे मानो किसी फूल की पंखुरियाँ किसी लम्बे पेड़ से किसी के ऊपर गिर रही हो |

गुलाबी टी -शर्ट उसके श्यामले बदन को ख़ूबसूरत तो बना ही रही थी पर उसकी सुंदरता में डूबने के लिए कुछ भी नहीं थी ,….थी तो उसकी हॅसने पर गाल और होठो के बीच बानी खाइयाँ तथा गालो पर बनने वाली डिंपल ,और डूबते हुए सूरज की मध्यम-मध्यम किरणें उसके गालो को और ही चमक प्रदान कर रहा था |
.
किसी को नीचे देख के मुस्कुराते  हुए उसके चेहरे पर साफ़ दिख रही थी .उसके गले में किसी चन्दन के फूल के डंडी  की भांति ना दिखना साफ़-साफ़ बता रही थी की वह पतली नहीं है |

उसकी ठुड्डी गोल ,सपाट एवं किसी फूल की कली की तरह अभी छोटी और प्यारी थी |

कानो में लगी छोटी सी एअर रिंग किसी को भी मोहित कर सकती थी .उसके नाक किसी तीखी मिर्च की भांति ज्यादा तेज तो नहीं पर करवी जरूर थी .उसके नयन -नक्श, खुदा ने बनाने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई थी ,मेरी तरह |

वह बड़ी ही विनम्रता पूर्वक ,सावधानी से तराशा गया था .उस दो बड़ी झील सी आँखों में लगी काले काजल किसी को  मदहोश करने के लिए काफी थे ,

परन्तु उसके काले लम्बे खुले बाल ,जो की उसके एक आँख को ढक रही थी ताकि किसी की नज़र ना लग जाए ,
तो दूसरी तरफ से कान में फँसी हुई आगे की ओर फैली हुई थी तो कुछ उसके कंधे से फिसल कर पीछे जाने को उतारू हो रही थी .वो अपने प्यारे ,नुकीले अँगुलियों ,जिसमे की नाख़ून पर लाल और गुलाबी नेल -पोलिश लगी हुई थी ,से बालों को ऊपर ले जाने की हर संभव कोशिश कर रही थी .परन्तु किसी पुराने आशिक़ की तरह बाल बार -बार उसके गालो को चुम रहे थे |

वह गेट से सीधा आकर रेलिंग के पास खड़े होकर नीचे देख के किसी से मुस्कुराते हुए बात करने लगी |

….क्या हुआ गोविन्द कब से आवाज दे रही हूँ सुन क्यों नहीं रहे हैं ..आंटी अपने बाएं हाथ से मेरा पीठ ठोकते हुए बोली .
हां -हां बोलिये …मैं हड़बड़ा के आंटी की ओर मुड़ते हुए बोला .
एग्जाम का तयारी हो गया?? उन्होंने बड़ी ही उत्सुकता से पूछा

प्रत्येक गार्डियन की ख्वाईश होती है की ,उनका बच्चा ही एग्जाम में टॉप करे ,
वो ये जानते ही नहीं की उनका बच्चा है कैसा ,और जो यह बात समझते है उनके ही
बच्चे टॉप करते है .और गार्डियन ऐसी बात सोचे भी क्यों ना ,वो जब हमें सारी
सुख -सुविधा मुहैया करवा ही रहे है ,तो क्या वो हमसे एक आशा नहीं रख सकते ,
सभी माता-पिता की यही ख्वाइश रहती है की जो वो ना कर सके ,वो उनका बच्चा
जरूर करें,किसी कारणवश जो काम मैं नहीं कर पाया वो कारण मेरे बच्चे के साथ नहीं आने
चाहिए|जो तकलीफ मैंने सही वो तकलीफ मेरे बच्चे को सहना ना पड़े|
प्रय्तेक माँ -बाप अपने बच्चे में अपना बचपन ढूँढ़ते है ,जीना चाहते हैं  |

हाँ ..पढ़ा हूँ ,पूरा तो पढ़ा हूँ ,अब बस कुछ फार्मूला वगैरा रिविशन कर रहा हूँ …मैंने
धीमे स्वर में सर हिलाते हुए कहा .

आपका कल एग्जाम हो और आपकी माँ पूछे बेटा तैयारी है ना पूरी तो आँखें नीचे होकर ,आवाज हमेशा धीमे स्वर
में ही निकलती है,पता नहीं क्यों..!

और वो वही पर मेरे साथ खड़ी होकर उसी ओर देखने लगी ….

तो, पूरा तैयारी हो गया ??…नीचे से उससे किसी ने पूछा .आवाज से लग रहा था वो आरती दीदी थी|
हां ..कल मैथ्स का पेपर है तो याद क्या करना ..बस कुछ प्रैक्टिस कर रही थी ..अभी थोड़ा मूड  फ्रेश करने ऊपर आयी हूँ …उसने बड़ी ही शालीनता से जवाब दिया |

अच्छा,तुम्हारा सेंटर कहाँ दिया है ?..आरती दीदी ने फिर पूछा .
KV में दिया है ..उसने तत्परता से बालो को एक तरफ करते हुए जवाब दी .

देखिये, उसका पूरा तैयारी हो चूका और आप रिविशन ही कर रहे है ,जाकर प्रैक्टिस कीजिये …आंटी ने मेरी ओर थोड़े प्यार वाली गुस्से की नज़र से देखते हुए बोली .

और मैं फिर से पंडित बद्री प्रसाद हरी-हरी बोल ….

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