क्यूंकि, वह एक आम नारी है..!!

वो नारी है , एक आम नारी .. और वो पुरुष शायद इसिलिये ... वो कल पीकर आया था , शायद ,आज भी आयेगा .. वो कल उसका इंतज़ार कर रही थी प्यासी रह कर , आज भी कर रही वो उपासी रहकर .. वो मारा था कल भी उन हसीन बालों को नोचकर ..... Continue Reading →

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भाषा क्या है..??

हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती,उड़िया, बंगाली.. हम सब बोलते है, कोई एक , कोई अनेक.. परन्तु, जब भी ये प्रश्न आती है तो कठिन ही लगती है, भाषा क्या है..?? शायद, वह जो हम बोलते है, वह जो हम सुनते है, वह जो हमें सुनाया जाता है, या, जो हमें सुनने को मजबूर किया जाता है.. नहीं... Continue Reading →

Is this a Love Story..??

I turned around on the bed, the pale sun rays blocked by the curtains rests upon my face. I look at her figure. The blanket stretched up, covering her face. Ever so slowly, I pull the blanket down. The hem of the blanket slid down her face, like fingers brushing over cheeks. And, like every... Continue Reading →

उसकी यादें , मैं और रेलयात्रा

यात्रीगण ,कृप्या ध्यान दे,गाड़ी संख्या 15910 लालगढ़ से चलकर कटिहार,न्यू जलपाईगुड़ी, गुआहाटी के रास्ते  डिब्रूगढ़ को जाने वाली अवध-आसाम एक्सप्रेस प्लेटफार्म संख्या 5 पर कुछ ही समय में आने वाली है | ..जैसे ही हमलोग स्टेशन पर पहुंचे अनाउंसमेंट हो रही थी. और ये आवाज़ कान में पड़ने के बाद कदम के चाल अपने आप... Continue Reading →

Honeymoon का तड़का

अरे रिया ,तुम्हारे गले पर क्या हुआ..?? जैसे ही मैं चेयर पर बैठी ...माँ सब्जी काटते हुए पूछी. कौन ..ये..ओह .. उउउममम ... वो जूही मौसी ने हार दिया था ना.... वो उसी का निशान लग गया होगा.. मैं घबराकर नज़र चुराते हुए ..खांशते हुए जवाब दी. हां..वो आर्टिफीसियल होगा..आज कल के लोग ना.. बस दिखावे... Continue Reading →

प्रेमकथा: एक बार तुम भी कहते

जैसे-जैसे.., मैं उसके हाथो की अंगुलियों को अपने हाथो में जकड़ती हुई उसके बदन के और करीब जा रही थी उसके आँख धीरे -धीरे बंद हो रही थी और उसकी साँसे तेज और हाथो की जकड़न मज़बूत हो रही थी, मैं बस अपने होठो की लाली से उसके होठ रंग देना चाहती थी , मेरे... Continue Reading →

कहीं ना फिर देर हो जाए…

भैया  1 किलो  भिंडी देना..कहते  हुए  मैं  अच्छे -अच्छे  भिंडी चुन कर पॉलीथिन में रखने लगा , साहब  एक  दम  फ्रेश  माल  है ..आज  ही  उतरा  है ..वो  रैंडम्ली भिंडी लेकर  तराज़ू  में  डालते  हुए  बोला . पटना  की  हाटों पर  सामान्यतः  ऐसा  ही  देखने  को  मिलता  है ..खचाखच भीड़ से भड़ी ,हर वक़्त पो -पो ..करती तीखी आवाजे आपके... Continue Reading →

दिल-ए-नादान

खता तो हुई है इस ज़ाहिल-ए-बद्तमीज से, हाँ, हुई है खता इस बेजऱ बेज़बान से.. मुझे तो हर वक़्त फ़ज़ होता है अपनी खता पर, हर वक़्त अफ़सोस होता है ,जख्म दिए परीवश जैसे उस दिल पर.. नाफ़िज़ कर गए मेरे कुछ मज़ाक ,पता है मुझे , उस खता की सज़ा कुछ तो होगी दे-दे... Continue Reading →

अज़नबी :अपनापन सा

SIN is equal to PERPENDICULAR by HYPOTANEOUS.....पंडित बद्री प्रसाद हरी -हरी बोल... छत पर टहलते हुए मैं याद करने की कोशिश कर रहा था .. सूरज भी अपनी तेज धीरे-धीरे समाप्त कर घर जाने को बेताब था और साथ में मेरी भी बेताबी बढ़ा रहा था आज का दिन ख़त्म करके ..कल से बोर्ड की... Continue Reading →

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