उसकी यादें , मैं और रेलयात्रा

यात्रीगण ,कृप्या ध्यान दे,गाड़ी संख्या 15910 लालगढ़ से चलकर कटिहार,न्यू जलपाईगुड़ी, गुआहाटी के रास्ते  डिब्रूगढ़ को जाने वाली अवध-आसाम एक्सप्रेस प्लेटफार्म संख्या 5 पर कुछ ही समय में आने वाली है | ..जैसे ही हमलोग स्टेशन पर पहुंचे अनाउंसमेंट हो रही थी. और ये आवाज़ कान में पड़ने के बाद कदम के चाल अपने आप... Continue Reading →

Honeymoon का तड़का

अरे रिया ,तुम्हारे गले पर क्या हुआ..?? जैसे ही मैं चेयर पर बैठी ...माँ सब्जी काटते हुए पूछी. कौन ..ये..ओह .. उउउममम ... वो जूही मौसी ने हार दिया था ना.... वो उसी का निशान लग गया होगा.. मैं घबराकर नज़र चुराते हुए ..खांशते हुए जवाब दी. हां..वो आर्टिफीसियल होगा..आज कल के लोग ना.. बस दिखावे... Continue Reading →

प्रेमकथा: एक बार तुम भी कहते

जैसे-जैसे.., मैं उसके हाथो की अंगुलियों को अपने हाथो में जकड़ती हुई उसके बदन के और करीब जा रही थी उसके आँख धीरे -धीरे बंद हो रही थी और उसकी साँसे तेज और हाथो की जकड़न मज़बूत हो रही थी, मैं बस अपने होठो की लाली से उसके होठ रंग देना चाहती थी , मेरे... Continue Reading →

कहीं ना फिर देर हो जाए…

भैया  1 किलो  भिंडी देना..कहते  हुए  मैं  अच्छे -अच्छे  भिंडी चुन कर पॉलीथिन में रखने लगा , साहब  एक  दम  फ्रेश  माल  है ..आज  ही  उतरा  है ..वो  रैंडम्ली भिंडी लेकर  तराज़ू  में  डालते  हुए  बोला . पटना  की  हाटों पर  सामान्यतः  ऐसा  ही  देखने  को  मिलता  है ..खचाखच भीड़ से भड़ी ,हर वक़्त पो -पो ..करती तीखी आवाजे आपके... Continue Reading →

दिल-ए-नादान

खता तो हुई है इस ज़ाहिल-ए-बद्तमीज से, हाँ, हुई है खता इस बेजऱ बेज़बान से.. मुझे तो हर वक़्त फ़ज़ होता है अपनी खता पर, हर वक़्त अफ़सोस होता है ,जख्म दिए परीवश जैसे उस दिल पर.. नाफ़िज़ कर गए मेरे कुछ मज़ाक ,पता है मुझे , उस खता की सज़ा कुछ तो होगी दे-दे... Continue Reading →

अज़नबी :अपनापन सा

SIN is equal to PERPENDICULAR by HYPOTANEOUS.....पंडित बद्री प्रसाद हरी -हरी बोल... छत पर टहलते हुए मैं याद करने की कोशिश कर रहा था .. सूरज भी अपनी तेज धीरे-धीरे समाप्त कर घर जाने को बेताब था और साथ में मेरी भी बेताबी बढ़ा रहा था आज का दिन ख़त्म करके ..कल से बोर्ड की... Continue Reading →

Knock-Knock!!

कभी-कभी हम क्या करते है,मालूम नहीं फिर भी करते रहते है.कभी किसी की याद आती है तो भूलने की कोशिश करते है ,कभी उसी को भुलाना नहीं चाहते..हमें मालूम नहीं हम क्या कर रहे होते है ,फिर भी करते रहते है. कभी किसी एक बात से हम बहुत कुछ समझ जाते है,कभी बहुत सारी बाते... Continue Reading →

कुछ यादें जो बनने बांकी है (NIT Silchar)

कमरे में था बैठा की एक ख्याल आया , कितने दिन 8-10 रोज हो गए आये यहाँ  , अभी तो यादें बनने शुरू भी नही हुई यहाँ बहुत सारी यादें बनानी यहाँ , नया शहर है नयी सी कुछ बात यहाँ , सबने कहा मनीष मत जाना वहाँ, सबकी बातें छोड़ अपने दिल की सुन,... Continue Reading →

Life is a PROGRAM

  जीवन क्या है ,एक Program, Header file इसके भगवान, Semicolon इसके प्राण , Main function है इसकी जान ज्यों छूटे किसी के प्राण , त्यों हो उसका सर्वनाश, जिसने इसपर फ़तह पाया Python वह कहलाया, जब कोई बात नहीं बने तो , if _else ही काम आया, साथ अपने switch को भी लाया, तभी... Continue Reading →

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